Darood E Tunajjina In Hindi फज़ीलत व अस्नाद | दुरूदे तु-नज्जीना इन हिंदी / Darood e tanjeena in hindi

Darood E Tu Najjina In Hindi

फज़ीलत व अस्नाद 

दुरूदे तु-नज्जीना इन हिंदी 


दुरूदे तु-नज्जीना 1 ऐसा दुरूद जो दुआ की
कुबूलियत के लिए पडा जाता है ये बहुत ही मशहूर दुरूद है लेकिन इसे किसी हराम काम के लिए न पड़ा जाए  अल्लाह से अपनी दुआ को कुबूल कराने के लिए इसकी तरकीब भी बेमिसाल चली आई है और इस दुरूद की तरकीब हदीस के मज़मून से बताई गई है ये दुरूद आपकोे  3 बार 11 दिन तक पड़ना है

दुरूदे तु-नज्जीना के अस्नाद

किताब "मनाहिजुल् मुहसिनात" शरह दलाइलुल् खैरात में लिखा है कि इब्ने मुनीर ने अपनी किताब "फजे मुनीरु" में ज़िक्र किया है कि एक बुजुर्ग शैख स्वालेह मूसा नाबीना (नेत्रहीन) थे। उन्होंने अपनी आपबीती मुझ से बयान की। कि एक मर्तबा एक जहाज़ डूबने लगा। मैं उसमें सवार था, इतने में मुझे ऊंघ सी मालूम हुयी। उसी हालत में नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझ को यह दुरुद बताया कि इसको जहाज़ पर सवार लोग हज़ार मर्तबा पढ़ें। अभी तीन सौ मर्तबा तक नहीं पढ़ा था कि जहाज़ डूबने से बच गया और समुद्र के तट पर पहुँच गया।

दुरूदे तु-नज्जीना की फ़ज़ीलत

  1. दुरूदे तु-नज्जीना हर मुश्किल मुसीबत में काम आती है
  2. अगर आप दुनियाबी दौलत हासिल करना चाहते है तो ये दुरूद पड़े
  3. कर्ज़ के बोझ से जब दब जाए तो उस कर्ज़ को दूर करने के लिए पड़े
  4. कारोबार में तरक्की और नौकरी में पुरमोशन के लिए इस दुरूद को पड़े
  5. दुश्मन को कमज़ोर करने और उसको फरमाबरदार बनाने के लिये पड़े
  6. अगर कोई मुक़दमा या केस चल रहा है तो उसे अपने हक़ में कराने के लिये पड़े
  7.  किसी रूठे हुए को मनाने के लिए पड़े
  8.  अगर आप अपनी पसंद से शादी करना चाहते है तो इस दुरूद को पड़े नियत निकाह की होनी चाहिए
  9.  अपने गुनाहों की माफी के लिए भी आप इसे पड़ सकते है
  10.  माँ बाप और तमाम रिश्तेदारो की मगफिरत के लिए भी आप इसे पड़ सकते है
Note - इस बात का खास ख्याल रखे कि कोई ऐसी हाजात या दुआ न हो जिससे किसी मुसलमान को नुकसान पहुंचे

जो लोग पड़ना नही जानते है वो क्या करे 🤔?? 

दुरूदे तु-नज्जीना जो पड़े लिखे लोग नही है उनके लिए ये दुरूद 3 बार 11 दिन तक सुन ना ही बेहतर है दुरूद 3 बार सुन लिया करे 11 दिन तक जो लोग पड़ना नही जानते है तो वो लोग इसको सुने  पड़ने और सुनने की बात बराबर ही है अगर आप पड़ना नही जानते है तो सुन ना ही बेहतर है जो लोग सुन रहे है उनका धियान जो है वो हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम  की तरफ होना चाहिए अपना मक़सद दिल मे रख कर आंसू बहाते रहे अगर आंसू न आये तो रोने जैसी शक्ल बनाये इन्शा अल्लाह जितनी बाते आपको बताई है सब पूरी होंगी । 

दुरूदे तु-नज्जीना को पड़ने का वक़्त-

आप इसे किसी भी बख्त पड़ सकते है, लेकिन बेहतर बख्त इसका रात को इंशा के बाद है ताज़ा बुजु बना कर अगर आप इसको सुन रहे है तो भी आप बुजु करे

दुरूदे तु-नज्जीना 👇


अल्लाहुम्म सल्लि अला सय्यिदिना मुहम्मदिन् सलातन् तु- नजीना बिहा मिन् जमीअिल् अह्वालि वल् आफ़ात्ति व- तकज़ी लना बिहा जमीअल हाजाति वतु तहिहरुना बिहा मिन् जमीअिस्सय्यिआति वतरफभुना बिहा अिन्दक आलद्द र जाति वतु-बल्लिगुना बिहा अकसल् गायाति मिन् जमीअिल् खेराति फिल हयाति वबा-दल् ममाति इन्नक अला कुल्लि शैइन् कदीर०

Note:- नाज़रीन ये था दुरूदे तु-नज्जीना फज़ीलत व अस्नाद  
 कुछ ज़रूरी बातें जो क़ुरआन और हदीस से साबित होती हैं। अगर आप का दीन और दुनिया से जुड़ा कोई सवाल है, या फिर आप हमें कुछ नसीहत करना चाहते हैं। हमें कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं।

उम्मीद करते हैं आप को पोस्ट पसंद आयी होगी

जज़ाक़ अल्लाह



Previous Post Next Post