Budh ke Din ki Fazilat/ बुध की दिन फजीलत/ budhwar ke din ki fazilat/ बुधवार की दिन फजीलत / दिनों की फजीलत

Budh ke Din ki Fazilat/ बुध की दिन फजीलत /बुधवार की फजीलत / दिनों की फजीलत

बुध का दिन बड़ा ही मुबारक दिन है और काफिरों के लिये बड़ा ही मन्हूस दिन है।

(तफ़सीर सादी जी 4 पे.125)

यह दिन मुबारक इस लिये कि बुध को थीमे नूर फरमाया गया है। इसीलिये तालीम या किसी किताब को बुध ही से शुरू करना बाइसे बरकत है। इसलिये बेहतर है कि इल्म भी नूर है और यह दिन भी यौमे नूर।

  कुछ रिवायतों में आया है कि बुध के रोज नाखून नहीं काटना चाहिये क्योंकि इस से सफेद दाग की बीमारी होने का खतरा है।

   बुध के दिन काफिरों के लिये इसलिये मन्हूस है कि इसी दिन कारून, किरऔन, नमरूद, शद्वाद वगैरह को अल्लाह तआला ने ख़त्म फरमाया।

बुध का रोज़ा

हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि जो कोई शख्स बुधवार, जुमेरात और जुम्आ के दिन रोजा रखेगा तो उसके लिये जन्नत में मोतियों और याकूत से एक बड़ा आलीशान महत तैय्यार किया जाएगा।

(गुनयतुत्तालिबीन जि. 2 पे 73)


बुध के दिन के नवाफिल

     हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि जो कोई शख़्स बुध के दिन जब सूरज कुछ बलन्द हो जाए तब 12 रकात दो दो करके इस तरह पढे कि हर रकात में सूरह फातिहा के बाद एक बार आयतल कुर्सी और तीन बार सूरह इख्लास व सूरह फलक व सूरह नास पढ़े।

    तो उस आदमी को अशें इलाही के पास से एक फरिश्ता पुकार कर कहता है कि ऐ खुदा के बन्दे ! तेरे पिछले तमाम गुनाह माफ कर दिये गए हैं और. कब्र की तंगी और तारीकी को भी दूर कर दिया गया है और कयामत की सख्ती से भी तुझे महफूज़ रखा गया है अब तू आइन्दा के वास्ते नेक अमल कर ।

(अहयाउल उलूम जि, 19205)


बुध की रात के नवाफिल

  • हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि जो शख़्स बुध की रात दो रकात नफ्ल इस तरह पढे कि पहली रकात में सूरह फातिहा के बाद सूरह फलक 10 बार और दूसरी रकात में सूरह फातिहा के बाद सूरह नास 10 बार पढ़े।

       तो 70 हज़ार फरिश्ते हर आसमान से उतरेंगे और उसका सवाब क्यामत के दिन तक लिखते रहेंगे।

• हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि जो शख्स बुध की रात में 6 रकात दो दो करके इस तरह पढ़े कि हर रकात में सूरह फातिहा के बाद सूरह आलि इमरान की आयत नम्बर 26 व 27 पढ़े। (कुलिल्लाहुम्मा से बेगैरि हिसाब तक) और नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़े " जज़ल्लाहु मुहम्मदनअन्न माहु व अह लुहू' तो अल्लाह तआला उसके 70 साल के गुनाह बख़्श देगा और उसके लिये दोजख से आज़ादी की सनद लिख देगा।

(अहयाउल उलूम जि. 1 पे. 206)

Note:- नाज़रीन ये था  बुध की दिन फजीलत / Budhavaar ke Din ki Fazilat / दिनों की फजीलत

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जज़ाक़ अल्लाह



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