Darood e taj | दरूद ए ताज हिंदी मै और दुआ-ए-ताज के फ़ज़ाइल

 दुरूद ताज और दुआ-ए-ताज के फ़ज़ाइल


दुआ-ए-ताज के फ़ज़ाइल

★ इस दुरूद शरीफ की बेशुमार विशेष्ताएँ हैं, जिनको इन मुख़्तसर स्थान में बयान करना निहायत कठिन है। लेकिन फिर भी चन विशेष्ताएँ बयान की जाती हैं। इस दुरूद की सबसे विशेष बात यह कि जो शख्स नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की जियारत की तमन्ना रखता हो उसे चाहिये कि चढ़ते चाँद की जुमा की रात को अिशा की नमाज पढ़ने के बाद वुजू करके किब्ला की तरफ मुँह करके पाक कपड़ा पहन कर खुश्बू लगाकर एक सौ सत्तर बार इस दुरूद शरीर को पढ़कर सो रहे। ग्यारह रातें इसी प्रकार पढ़े तो अल्लाह ने चाहा से नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की अवश्य ज़ियारत होगी।

★ दिल की सफाई के लिऐ हर रोज़ फज्र की नमाज़ के बार सात मर्तबा और अस की नमाज़ के बाद तीन मर्तबा और अिशा को नमाज़ के बाद तीन मर्तबा पढ़ें।

★ जादू, आसेब, जिन्न, शयातीन, वबा, चेचक, फसाद ओ इनके अलावा बहुत सारी बीमारियों में ग्यारह मर्तबा पढ़कर दम करे।

★रोजी में कुशादगी के लिये सात मर्तबा सुब्ह की नमाज़ के बाद हमेशा वज़ीफ़ा रखें।

★ बाँझ महिला के लिये 21 खजूरों पर सात-सात मर्तबा उन करें और हर दिन एक खजूर उस को खिलायें। फिर जब माहवारी है। पाक-साफ हो तो उससे संभोग करे, अल्लाह के फजल से नेक स्वालेह लड़का पैदा होगा।

★ गर्भवती महिला को बच्चा के गिर जाने का डर हो तो हर दिन तक सात मर्तबा बराबर पानी पर दम करे और पिलाये

दुरूद ताज


बिस्मिल्ला हिर्रहमा निर्रहीम्

अल्लाहुम्म सल्लि अला सध्यिदिना वमौलाना मु-हम्मदिन साहिबित्ताजि वल् मेअरजि वल् बुराकि वल-अ-लम्० दाफिअिल् बलाई वल् वबाइ वल् कत्ति वल् म-रजि वल् अ-लम्० इस्मुहू मक्तूवुन मरफूअन् मश्फूअन् मन्कूशुन् फिल्लौहि वल् क-लम्ठ सव्यिदिल अ-रबि वल् अ-जम्० जिस्मुहू मु- कद्दसुन मु- अत्तरुन् मु-तहहरुन् मु-नव्वस्न फ़िल्बैति वल् ह-रम्० शम्सिज़्ज़ुहा बद्रिद्दुजा सद्दिल भुला नूरिल हुदा कहफिल् वरा मिसबाहिज्जु - लम्० जगीलिश्शि-यम् शफीअिल् उ-मम्० साहिबिल् जूदि वल्-क-रम्० वल्लाहु आसिमुहू० वजिब्रीलु खादिमुह्० वल्बुराकु मर्-क-बु६० वल्मेअराजु स-फ़रुहू वसिद्-रतुल् मुन् तहा मकामु० वका-ब कौसैनि मल्लूबुह्य वल् मतलूबु मकसूदुहू वल्-मक्सूदु मौजूदुह्० सय्यिदिल् मुर-सलीन्० स्वातिभिन्नविय्यी - न शफीअिल् मुज़निबीन्छ अनीसिल गरीबी-न रह-म- तल्लिल् आ-लमीना रा-हतिल् आशिकीन्ा मुरादिल मुश्ताकीन्। शसिल आरिफीन० सिराजिस्सालिकीनए मिस्बाहिल मु-कर्रबीन्ए मुहिब्बिल फु-कराइ वल्-मसाकीन्। सव्यिदिस्स- कलैनि नबिय्यिल ह-रमैन्० इमामिल किब-लतेन ० वसी-लतिना फिद्दारैन्० साहिबि का-ब कौसेन्० महबूबि रब्बिल मारिकैनि वल मगरिबैन्ति जद्दिल ह-सनि वलहुसैन्० मौलाना वमौ-लस्स-कलैन०. अबिल् कासिमि मु-हम्मदिन्नि अढिल्लाहिए नूरिम्मिन नूरिल्लाहिए पा-अय्यु-हल मुशताकू-न बिनूरि जमालिही सल्लू अलैहि व आलिही व-अस्हाबिही व-सल्लिमू तस्लीमा०

नॉट :- नाज़रीन ये था दुरूद ताज और दुआ-ए-ताज के फ़ज़ाइल

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जजाकल्लाह

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